Monday, 21 September 2026

Picture Window: रिझाना  क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रे...

Picture Window: रिझाना  क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रे...: रिझाना  क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रेमिका को रिझाना चाहता है ! चकोर चाँद को रिझाना चाहता है ! शिष्य अपने गुरु को रिझाना चाहता ...

Picture Window: रिझाना  क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रे...

Picture Window: रिझाना  क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रे...: रिझाना  क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रेमिका को रिझाना चाहता है ! चकोर चाँद को रिझाना चाहता है ! शिष्य अपने गुरु को रिझाना चाहता ...

Sunday, 8 October 2023



                 





                                 rahta hoon tere galiyon mein, ik nazar ke sadke baitha hoon

kabhi toh mehaerbaan honge tum, kabhi toh haath thamoge.

                girebaan hain mera maila, nazar bhi meri dhundhali hai

bahut dekha zamane ko, bahut khoya bahut paaya

        bigdi bante dekhi meri, phir samaj paaya

ki kuch bhi ho jaaye ab, yeh dar kahan chhod jaana hai.


Friday, 10 February 2023




तेरे कूचे में रहने को घर जो मिला 
यह कर्म था तेरा मुझपर
अब इस सुकूने शान को छोड़कर चला जाऊँ 
वह  फरेब मुझ में नहीं 
न ही तेरे कर्म को नाकारा कर दूँ 
यह जिल्लत मैं न उठाऊँगा. 
सच कहूं जो खुशी  मुझे यहाँ  मिलती  है 
वह दुनिया के सारे  ग़मों  से बढ़कर है !

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जैसे कबीर ने शायद कभी कहा होगा _
वह जहाँ भी रहें खुश रहें , आबाद रहें 
अपना तो क्या है _ आपके क़दमों में रहें 
तो आबाद क्या, बरबाद रहें,
सब एक ही है!


गुरु चरणों में नत मस्तक प्रणाम !


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Thursday, 24 November 2022

 


Let my mind be cleared of the black clouds 

that gather in droves, so that I can see again

the sun shine and in that your presence.


Let my mind then dwell on that and my

heart overflow with bliss and my eyes with

salted tears.


 

Friday, 11 January 2019






कभी भी ऊपर से निचे जाना पड़े तो ठीक है 
और कभी ऊपर से ऊपर को जाना पड़ा तो भी ठीक है 
और फिर भूले से नीचे जाना पड़ा 
तो मैं कभी भुले से भी कभी भूल जाऊं आप को 
आप तो नहीं भूलना _
अपनी याद मैं जरूर रखना 
और अपनी याद भी जरूर दिलाना 
क्योंकि एक ही आधार है इस जहाँमें मेरे लिए 
आप ही हो!

Monday, 22 October 2018






अभी तो प्याला हाथ ही आया है यो यह हाल है
अभी तो ठीक पिया भी नहीं तो रंग चढ़ने लगा है 
तो कैसे सोच सकता हूँ कि अंत में क्या हाल होगा 
बहार हाल लगता है अच्छा ही होगा 
अच्छा क्या, लाजवाब होगा. 

अभी तो तस्वीर आपकी उतरी ही नहीं दिल में
 ठीक तरह, मैल भी नहीं निकला है दिलसे मेरे 
बस आपके वचनों को दिल में उतार कर अमल करूँ 
यह तो जब होगा जब दिल मेरा साफ़ होगा। 

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Wednesday, 25 July 2018



"जबसे पाया है तुमको ग़ुरुवर 
दिल मेरा तो बसमे नहीं है" 
झोलियाँ भरी हुई हैं सबकी 
मेरी झोली भी तो खाली कम नहीं है!

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Wednesday, 11 July 2018






 जब मैं नहीं, तब भी तुम हो 
जब तुम ही हो, तो मैं क्यों ?





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Wednesday, 10 January 2018


गुरुकृपा 



                               हमने तो अपनी जिंदगी में जब से गुरुवर को पाया 
तो यह समज में आया है की गुरुकृपा बिना हम कुछ भी नहीं 
   और  
दूसरी बात _
"मारी तो गाडी चाले राम के भरोसे जी "



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गुरुदेव की तस्वीर अमृतवाणी सत्संग प्रेमी की और से ली गयी है  - उन्हें सादर धन्यवाद !


Sunday, 10 September 2017






नहीं कोई मंझिल थी मेरी फिर भी तेरा दर पा गया 
न थी मेरी आस्था इतनी फिर भी तुझे ढूंढ लिया 
मेरे कदमों ने खुद ही तय किया की तू ही मेरी मंज़िल है !
....यह मैंने नहीं किया !
यह कृपा तेरी ही है की मेरा सर तेरे सामने झुक गया है !


Sunday, 3 September 2017




तेरा कुछ भी नहीं सब कुछ है 
मेरा कुछ भी नहीं इक तू ही है 


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Sunday, 11 June 2017










तेरा मेरा क्या रिश्ता?
जो तू है , मैं वही हूँ 
तेरा मेरा यह रिश्ता!





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गुरुदेव की तस्वीर एक सत्संग प्रेमी की है!





Wednesday, 8 February 2017




जिसके भाग्य में तेरा दर लिखा है
उसे कहाँ फिर कहीं जाना है 







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Monday, 13 June 2016

                                                         



 ऐ खुदा , तेरी रहमत बड़ी की तू बड़ा है 
                                                          नहीं जानता मैं ,
                                                          बस इतना समझ लिया है की
                                                          तू मेरे साथ खड़ा है !   






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Friday, 3 June 2016


रिझाना 

क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रेमिका को रिझाना चाहता है ! चकोर चाँद को रिझाना चाहता है ! शिष्य अपने गुरु को रिझाना चाहता है !  क्या करें ?  प्रेम का आलम ही कुछ ऐसा है !

आमिर खुशरो अपने मुर्शिद निजम्मुद्दीन औलिाया के दरबार की झूठी प्लेटें चाटना ही अपनी खुशकिस्मती समझते हैं !

हज़रात निजामुद्दीन औलिया  और आमिर खुशरो 

जलाल-उद्दिन  रूमी अपने गुरु शम्स तबरेज़ से इतनी मुहब्बत करता है कि वह उनमें और अपने में 
फरक ही नहीं कर सकता !


                                                                     जलाल - उद्दीन  रूमी 

बुल्ले शाह 
जब गुरु हज़रात शाह इनायत खान, बुल्ले शाह से किसी बात पे बहुत ही गुस्सा हो गए और अपना मुंह तक नहीं दिखाने को कहा, तो अपने रूठे हुए गुरु शाह इनायत खान क़ादरी का वियोग बुल्ले शाह नहीं सह सके ! कोई उन्हें सलाह देता है की तुम्हारे गुरु को नाच गाना बहुत ही पसंद है ! तो अपने गुरु को रिझाने के लिए बुल्ले शाह नाच सीखते हैं और अपने आप को नाचने वाली औरतों की टोली में छुपाते  हुए गुरु दरबार पहुँच जाते हैं ! डर के मारे वह दूर से नाचते हैं , गुरु के पास नहीं आते ! पर गुरु बुल्ले शाह को पहचान ही लेते हैं ! बुल्ले शाह की बेसब्री, प्रेम , वियोग और नाच ने उनके क्रोधित गुरु का दिल आखिर पिघला ही दिया !  

पर हमें कहाँ ऐसे अहोभाग्य की प्राप्ति है ? हमारा मन तो बड़ा बेईमान है ! दिल भी खोटा रखते हैं ! हम अपने गुरुदेव को रिजाने  के लिए जो सच्चा मन चाइये, वह कहाँ से लाएं ? 



गुरुदेव स्वामी राजेन्द्रजी महाराज 

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गुरु चरणों में !

अन्य फोटो क्रेडिट्स : गूगल से  फ्री  इमेजेज !

गुरुदेव स्वामी राजेन्द्रजी महाराज : अमृतवाणी के एक प्रेमी की कृपा से !





Wednesday, 18 May 2016





The long line of scriptures, sages, and seers
All proclaim the Truth.
But sometimes it takes a whole lifetime,
To open one's eyes to That!

We come into this world of physical science and matter, 
Where we measure happenings through our pitiful standards,
Little knowing that it takes but a plunge,
Into deep waters, to reach the other shore.

All along the route the signs point the way
Sometimes tripping you up,
Sometimes pushing you along.

And sometimes appears a saint, 
Who kindly give you His hand.
And you trot after Him,
Stumbling and prancing like a child.
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Sunday, 15 May 2016



Translation of  previous post :



You are on this side of the shore,
You are on the other side of the shore too.
Then where is the joy, 
And where is the sadness! 
You are with me in my victory
And You are also with me in my defeats!


When I opened my eyes I found You,
Then what is left to be seen!
Then why should I cry, I did not get anything
Why should I tell all, I did not get anything 
I did not get anything, I did not get anything.


You are this world that I see, You are also not this world
Then where is the joy and where the sadness
You are on this side of the shore and You are on the other side of the shore too !


___________________________ Devidas.


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Wednesday, 11 May 2016


इस पार भी तुम, उस  पार भी तुम
                                                        फिर कैसी ख़ुशी, और फिर कैसा ग़म 
                                                       मेरी जीत में भी तुम, मेरी हार में भी तुम !

जब आँखें खुलीं मैंने पाया तुम्हें 
फिर रह गया क्या अब देखने को !
फिर क्यों तड़पूं,  मुझे कुछ न मिला
यह कहता फिरूं,  मुझे कुछ न मिला 
मुझे कुछ न मिला, मुझे कुछ न मिला !

                                                        संसार भी  तुम, न संसार  भी तुम  
                                                        फिर कैसी ख़ुशी , फिर कैसा ग़म 
                                                        इस पार भी  तुम,उस पार भी तुम ! 

                                                                                                           -----------------देवीदास कृत 

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